ईश्वर का पता कहाँ है
मन ढूंढता रहा है,
कोई कहे यहाँ है
कोई कहे वहाँ है।
मगर जब गौर से देखा
मुझे ईश्वर दिखा उसमें
कि था जब भूख से व्याकुल
खिलाई रोटियाँ जिसने।
गिर पडूँ तो सहारा दे
वही है देवता मेरा
जरूरत पर मदद कर दे
वही भगवान है मेरा।
दिखा दे नेकियों का पथ
प्रेरणा दे मुझे सत की
मुझे उत्साह दे दे जो
वही भगवान है मेरा।
जहाँ नफरत न हो बिल्कुल
मुहब्बत का रहे डेरा,
जहाँ ईमान रहता हो
वहाँ भगवान है मेरा।
वहाँ भगवान है मेरा
Comments
2 responses to “वहाँ भगवान है मेरा”
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दिखा दे नेकियों का पथ
प्रेरणा दे मुझे सत की
मुझे उत्साह दे दे जो
वही भगवान है मेरा।
जहाँ नफरत न हो बिल्कुल
मुहब्बत का रहे डेरा,
_________ संपूर्ण कविता में एक सच्चाई और यथार्थ के दर्शन हो रहे हैं। जीवन के प्रत्येक दृष्टिकोण को अपने में समाहित करती हुई कवि सतीश जी की, बहुत ही श्रेष्ठ रचना, उच्च स्तरीय लेखन -

बहुत ही उत्तम लेखनी
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