वाणी में मधुरता हो,
बैरी भी अपने बन जाए,
मुख से निकले व्यंग्य बाण,
हृदय में नासूर बनाएं,
ह्रदय के नासूर में,
मीठी वाणी का मरहम लगाएं,
अपने हो या बेगाने,
सभी से अपनत्व पाएं।।🥰🥰
वाणी में मिठास
Comments
5 responses to “वाणी में मिठास”
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वाणी में मधुरता रखने की बात कहती अमिता जी की बहुत ही उत्कृष्ट रचना
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प्रेरक विचार
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बहुत सच्ची बात
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सुंदर
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सुंदर समीक्षा हेतु आप सभी का धन्यवाद
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