विजय मिली विश्राम न समझो

ओ विप्लव के थके साथियों
विजय मिली विश्राम न समझो
उदित प्रभात हुआ फिर भी छाई चारों ओर उदासी
ऊपर मेघ भरे बैठे हैं किंतु धरा प्यासी की प्यासी
जब तक सुख के स्वप्न अधूरे
पूरा अपना काम न समझो
विजय मिली विश्राम न समझो

पद-लोलुपता और त्याग का एकाकार नहीं होने का
दो नावों पर पग धरने से सागर पार नहीं होने का
युगारंभ के प्रथम चरण की
गतिविधि को परिणाम न समझो
विजय मिली विश्राम न समझो

तुमने वज्र प्रहार किया था पराधीनता की छाती पर
देखो आँच न आने पाए जन जन की सौंपी थाती पर
समर शेष है सजग देश है
सचमुच युद्ध विराम न समझो
विजय मिली विश्राम न समझो

Comments

6 responses to “विजय मिली विश्राम न समझो”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

  2. राम नरेशपुरवाला

    👍

  3. राम नरेशपुरवाला

    Sahi h

  4. Annissa asuman Avatar

    Hello dear how are you doing? My name is Annissa ASUMAN contact me with this e-mail address ;;(annissasum248@gmail.com;; i have something very important to tell you thanks

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