वो कतराने लगे हैं

वो हमसे कतराने लगें हैं
धीरे- धीरे दूर जाने लगे हैं
दिल में उनके जगह नहीं
बची है हमारे लिए,
तभी तो हमसे नजरें चुराने लगे हैं…

Comments

3 responses to “वो कतराने लगे हैं”

  1. Geeta kumari

    क्या बात है,लाजवाब

  2. कवि प्रज्ञा जी की बहुत सुंदर कविता

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