7 Comments

  1. लो और कर लो इश्क़ ….
    मैं ना कहता था कि ये दर्द हैं मजा नहीं , एक सजा हैं नशा नहीं ..:)

    1. हम अभी भी कहते है इश्क़ पाक साफ खुदा की रहमत है,
      कर लो एक बार बरखुरदार,
      आग और कांच जैसी सीरत है।

      1. ये लो..इश्क़ में जल कर भी वो इश्क़ को खुदा कहते है
        जहर पी कर भी इसे वो जाम कहते है
        किस कदर इश्क़ की बीमारी छायी है मैडम,
        कि जख्म खाकर भी इसे मर्ज की दवा कहते है ।

        लेकिन अच्छा लिखा है… ये जो हिंदी और पंजाबी के सम्बन्ध मजबूत करने की कोशिश की है ना आपने , वो काबिल-ए-तारीफ है …;):)

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