वो क्या जिए ज़िन्दगी जो रिवाज से जिए

वो क्या जिए ज़िन्दगी जो रिवाज से जिए,
जो हम जिए, बेफ़िक्र-ओ-ख़ुशमिज़ाज से जिए.

अब तक न हो पाया तो कोई अफ़सोस नहीं,
जिसे जीना हो खुल के, वो बस आज से जिए.

Comments

4 responses to “वो क्या जिए ज़िन्दगी जो रिवाज से जिए”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

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