वो भी ज़हर खा बैठे, हम भी ज़हर खा बैठे

उनकी तग़ाफ़ुल का नतीज़ा क्या कहे तुम सब से
हम अपनी मोहोब्बत को तबाह कर बैठे,

वो न जी सके हमारे बेगैर, और हम न जी सके उनके बेगैर
वो भी ज़हर खा बैठे, हम भी ज़हर खा बैठे……………………………..!!

Comments

2 responses to “वो भी ज़हर खा बैठे, हम भी ज़हर खा बैठे”

  1. Abhishek kumar

    बहुत अच्छे

  2. Abhishek kumar

    सुन्दर रचना

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