वो मुकाम पाऊँ

वो मुकाम पाऊँ!
बस एक ही तमन्ना है जीतेजी ही नहीं
मरके भी सबो के काम आऊं
सारी खुबिया हो मुझमें
पसंद बनू हर मन की वो मुकाम पाऊँ !
दिया तो बहुत कुछ है, अब और क्या मान्गू
सहेजना आया ही नहीं,तुझे इसमें क्यू सानू
बस अरज है इतनी, जो है उसे संभाल पाऊँ
पसंद बनू सबकी—————!
थक गयी हूँ बहुत खुद को सुलझाने में
कसर कहाँ रखी बाकी मुझे उलझाने में
हर उलझनों को खुद से ही सुलझा पाऊँ
पसंद बनू सबकी वो———–!
तेरे करम पे विश्वास कम हो ना पाए
हर वक्त काम मेंरे तेरी ही रहम आए
फ़ितरत हो ऐसी,दूर तुझसे जा ना पाऊँ
पसंद—————————!
सुमन आर्या

Comments

11 responses to “वो मुकाम पाऊँ”

  1. Satish Pandey

    अतिसुन्दर

    1. Suman Kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद

  2. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    बेहतरीन प्रस्तुति
    मैडम पंक्तियों को पूरा लिखा करो ताकि पढ़ते समय तुक बनी रहे

  3. This comment is currently unavailable

    1. Suman Kumari

      thanks

  4. Geeta kumari

    बहुत सुंदर रचना

    1. Suman Kumari

      thanks

    1. Suman Kumari

      .धन्यवाद

  5. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

Leave a Reply

New Report

Close