आरज़ू नहीं रखता कि पूरी कायनात में मशहूर हो शक्सियत मेरी।
जनाब! आप जितना जानते हो सच में उतनी ही है पहचान मेरी।।
शख्सियत मेरी
Comments
4 responses to “शख्सियत मेरी”
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Nice line
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Nice
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शास्त्री जी आपका और मेरा साथ कितना पुराना है और मैंने कभी भी क्या से भरा हुआ नहीं पाया आप सभी के साथ समान व्यवहार करते हैं आपके चेहरे पर जो कांति है मुझे बहुत अच्छी लगती है
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बहुत ही सुंदर लेखनी
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