शायरी (दर्द ए इश्क़ और शराब)

दर्द ए इश्क़ और शराब!
दोनों एक जैसे हैं, जनाब!
नशा चढ़ने पर,
ज़माना फर्जी सा लगता है।

Comments

7 responses to “शायरी (दर्द ए इश्क़ और शराब)”

  1. Satish Pandey

    waah waah

  2. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    Thank you sir 🙏

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      Thank you

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      🙏

  3. Pratima chaudhary

    सुन्दर प्रस्तुति

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