शिकायत

तुम्हारी नाराजगी को मैं हरगिज समझती हूं
अपनी गलतियों को भी खूब समझती हूं
पर इंसान हूँ गलती तो हो ही जाती है
अपनों से ही तो शिकायत जाती है

Comments

2 responses to “शिकायत”

  1. अतिसुंदर रचना 

    1. धन्यवाद आपका 

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