आदतों में कहाँ ये शुमार है
अपनों के लिए जगह नहीं
बस औरों के लिए प्यार है ।
आपकी अदा है
आपका अपना यह सारा जहाँ
बस गैरो की खातिर
अपने से ही टकरार है ।
शुमार
Comments
4 responses to “शुमार”
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सुंदर
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बहुत बहुत धन्यवाद
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बहुत ही सुन्दर।
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बहुत बहुत धन्यवाद अमित जी
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