नहीं कुछ और कहना है
आपके साथ चलना है ।।
स्थितियां अनुकूल हो न हो
सुख से मुलाकात हो ना हो
पर हर घङी, हर कदम
मेरे हमदम, न रुकना है
आपके साथ चलना है ।।
कोई भी लम्हा अब ऐसा न हो
ना दूर रहूँ, हालात कैसा भी हो
आप मेरे लिए जियो ना जियो
मुझे मेरे हमदम संग- संग रहना है
आपके साथ चलना है ।।
रहूँ जबतक, तीज का व्रत करती रहूँ
लाल रंग के दमक से सजती-संवरती रहूँ
चौथ के चाँद की पूजा , करती, निरखती रहूँ
मेहन्दी का रंग आलता के संग यूँ ही पहनना है
रूठते, अपना हक जताते,आपके संग चलना है ।।
संग चलना है
Comments
14 responses to “संग चलना है”
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बहुत ही सुन्दर भाव से सजाया है आपने।
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सादर धन्यवाद
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बहुत बहुत धन्यवाद
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मेहन्दी का रंग आलता के संग यूँ ही पहनना है
रूठते, अपना हक जताते,आपके संग चलना है ।।
बहुत ही लाजवाब पंक्तियों की सृष्टि की है आपने, वाह-

सादर आभार
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बहुत सुंदर पंक्तियां
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सादर आभार
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बहुत सुंदर रचना
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बहुत बहुत धन्यवाद
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अति,
अतिसुंदर-

सादर आभार
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बहुत सुंदर कविता
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सादर आभार
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