संग चलना है

नहीं कुछ और कहना है
आपके साथ चलना है ।।
स्थितियां अनुकूल हो न हो
सुख से मुलाकात हो ना हो
पर हर घङी, हर कदम
मेरे हमदम, न रुकना है
आपके साथ चलना है ।।
कोई भी लम्हा अब ऐसा न हो
ना दूर रहूँ, हालात कैसा भी हो
आप मेरे लिए जियो ना जियो
मुझे मेरे हमदम संग- संग रहना है
आपके साथ चलना है ।।
रहूँ जबतक, तीज का व्रत करती रहूँ
लाल रंग के दमक से सजती-संवरती रहूँ
चौथ के चाँद की पूजा , करती, निरखती रहूँ
मेहन्दी का रंग आलता के संग यूँ ही पहनना है
रूठते, अपना हक जताते,आपके संग चलना है ।।

Comments

14 responses to “संग चलना है”

  1. Praduman Amit

    बहुत ही सुन्दर भाव से सजाया है आपने।

    1. Suman Kumari

      सादर धन्यवाद

  2. This comment is currently unavailable

    1. Suman Kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद

  3. Satish Pandey

    मेहन्दी का रंग आलता के संग यूँ ही पहनना है
    रूठते, अपना हक जताते,आपके संग चलना है ।।
    बहुत ही लाजवाब पंक्तियों की सृष्टि की है आपने, वाह

    1. Suman Kumari

      सादर आभार

  4. मोहन सिंह मानुष Avatar

    बहुत सुंदर पंक्तियां

    1. Suman Kumari

      सादर आभार

  5. बहुत सुंदर रचना

    1. Suman Kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद

    1. Suman Kumari

      सादर आभार

  6. बहुत सुंदर कविता

    1. Suman Kumari

      सादर आभार

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