ह्र्दयतल में बंशीधर ने सखा सुदामा कुछ ऐसे बसाये लिए,
दुःख सुख सब जैसे श्रीधर ने सारे आप ही दूर भगाए दिए,
रहे ग्वालों और ग्वालिन के संग राधे, प्रेम रस गगरी छलकाए दिए,
जब मुरली बजाये मोहन तो हर जीव के मन को जगाये दिए,
जब देखि दसा मित्र अपने की वो अश्रु आँखन से बहाये दिए,
भागे सन्देस मिलत ही वो द्वारे पे,
मित्र को तन से चिपटाये लिए,
धोकर कान्हा चरणन को सुदामा नई प्रीत की रीत चलाये दिए,
प्रेम की डोरी से बंधे श्री राधे जी सच्चे मित्र का मोल बताये दिए।।
राही (अंजाना)

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