सच का चिमटा साथ हो

आप इतने निडर बनो, डर डर से भग जाय,
सच का चिमटा साथ हो, भूत स्वयं भग जाय।
आगे ही बढ़ते रहो, पीछे मुड़ो न आप,
सच की माला हाथ में, राम नाम का जाप।
जोर लगाओ रगड़ में, दो पाथर के बीच,
पाथर का पानी करो, पथ को डालो सींच।
चलती चींटी मारकर, मत लेना तुम पाप,
साईं करते न्याय हैं, नहीं करेंगे माफ।

Comments

2 responses to “सच का चिमटा साथ हो”

  1. बहुत खूब कविता वाह

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