7 Comments

  1. जब भी पढ़ता हूँ..
    सहमा-सहमा-सा..
    जाने क्या है ! जानता नहीं हूँ मैं..
    आदि होना चाहिए था..
    शिल्प में भी दम नहीं है
    बस भाव प्रधान है इसलिए सारी कमियां छुप जाती हैं आपकी..
    आगे से ध्यान रखिए और कुछ ढंग का लिखा करिये…
    नमस्ते

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