सड़क दुर्घटना:- मानवता निष्प्राण पड़ी है…

मानवता निष्प्राण पड़ी है
कब से देखो तड़प रही है
कोई सहारा देने ना आया
कितने लोगों की भीड़ लगी है
कोई खींचता फोन से फोटो
मेरी लाईव वीडियो वायरल हुई है
हाय करे कोई तौबा बोले
मेले जैसी भीड़ लगी है
नहीं सहारा दिया किसी ने
हाथ भी लगाया नहीं किसी ने
मेरी आत्मा सिसक रही है
मानवता निष्प्राण पड़ी है
कब से देखो तड़प रही है।।

Comments

6 responses to “सड़क दुर्घटना:- मानवता निष्प्राण पड़ी है…”

  1. Ekta

    मानवता निष्प्राण पड़ी है
    कितने दुख की घड़ी है
    लोग देख रहे हैं बनकर तमाशा
    भीड़ तो बस तमाशा बनकर खड़ी है..
    बहुत मार्मिक अभिव्यक्ति

    1. Pragya

      इतनी सुंदर समीक्षा हेतु धन्यवाद

  2. अतिसुंदर रचना 

  3. Amita

    मेरी आत्मा सिसक रही है मानवता निष्प्राण पड़ी है,
    बहुत ही मार्मिक अभिव्यक्ति

    1. Pragya

      बहुत-बहुत धन्यवाद अमिता इतनी सुंदर समीक्षा लिए

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