✍? गजल ?✍
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सत्य असत्य मे क्या सच्चाई है
ईमान बेईमान के बीच लड़ाई है
इंसान का इंसान मे नही विश्वास
मानव का मानव के बीच खाई है
परिवेश मे घुला है जहर ही जहर
वर्तमान के देह मे पीड़ा समाई है
दुष्ट दुष्कर्मो का बढ रहा सम्मान
शरीफो की स्थिति यहाॅ बेहयाई है
बना हुआ है भूमि का ठौर कुरुक्षेत्र
संघर्ष की नियति देखो मुस्कुराई है
ऊठ जाग ! अर्जुन ताड ले हालात
अब घड़ी परीक्षा की तेरी आई है
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श्याम दास महंत
घरघोडा
जिला-रायगढ (छग)
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