2 Comments

  1. “संपदा देखकर तुम मनुज को तोलना मत।..
    धन नहीं मन का मानक सदा यह भान रखना।”
    कभी भी किसी की धन संपदा देखकर प्रभावित नहीं होना चाहिए, वरन् उसका व्यवहार देखकर प्रभावित होना चाहिए, इसी उच्च स्तरीय सोच को प्रस्तुत करती हुई उत्कृष्ट कथ्य और सुन्दर शिल्प लिए हुए कवि सतीश जी की बहुत उत्तम रचना,उम्दा लेखन

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