सफा-सफा रहते है……..

हमारी इस बात से भी लोग हमसे खफा रहते है
के हम सब से क्यों रफा-दफा रहते है

के रंग-ऐ-बईमानी जब सब पर चढ़ी है इस दुनिया में
तो क्यों हम हरदम सफा-सफा रहते है…………………………..!!

D K

Comments

One response to “सफा-सफा रहते है……..”

  1. Abhishek kumar

    सुन्दर रचना

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