भेड़िए से सब तरफ
फैले हुए हैं आज भी
हैं लगाये टकटकी
इज्जत मिटाने दूसरे की।
वासना अपनी
जहर सी वे उगलते हैं,
राह चलती जिन्दगी को
वे निगलते हैं।
पापियों के पाप पर
अब लगानी आग है
पापियों का पाप
मानव सभ्यता पर दाग है।
कील ठोंको उन कुकर्मी
भेड़ियों के हाथ में
सौंप दो जनता के हाथों
सूली चढ़ा दो साथ में।
न्याय में देरी न हो
कर लो त्वरित अब कार्यवाही,
मत दबो दुष्टों के आगे
सब करेंगे वाहवाही।
सभ्यता पर दाग है
Comments
6 responses to “सभ्यता पर दाग है”
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पापियों के पाप पर अब लगानी आग है,
पापियों का पाप मानव सभ्यता पर दाग है।।
उच्च कोटि की रचना🙏🙏 -

माह के सर्वश्रेष्ठ कवि सम्मान प्राप्त होने पर बहुत बहुत बधाई सर।आपकी रचनाएं अप्रितम हैं। उच्चस्तरीय साहित्य।
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सर्वश्रेष्ठ कवि घोषित होने पर पाण्डेय जी को बहुत बहुत बधाई। आपकी लेखनी बहुत सहजता से चलती रही है वाह।
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न्याय में देरी न हो कर लो त्वरित अब कार्यवाही,
मत दबो दुष्टों के आगे सब करेंगे वाहवाही,
प्रेरणादाई रचना -
अतिसुंदर भाव पूर्ण रचना
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ईंट के जवाब पत्थर साबित हुई आपकी कविता।
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