समुंद्र मंथन

आसुरी शक्तियों का जोर है अभी,
इनको मिटाना है शोर करें सभी
करना है समुंद्र मंथन,
हाँ, निकलेगा पहले हलाहल
मगर बहेगी अम्रृत धारा भी
यही समय की माँग है,
सत्मार्ग पर चलें सभी
जीतेंगे हम सत्मार्ग पर चल कर ही
विरोध करेंगी शक्तियां आसुरी,
बजाएंगे कान्हा फ़िर से बांसुरी
हरि धुन में खो जाना है,
मानवता का सबको पाठ पढ़ाना है
मति भ्रम फैला रहे हैं असुर,
मकसद है इनका, केवल विनाश का
इनके मकसद को विफ़ल कराना है,
सत्मार्ग और सच्चाई की ज्योति जलाना है

Comments

4 responses to “समुंद्र मंथन”

    1. Geeta kumari

      धन्यवाद भाई जी

  1. वाह क्या कहने। 

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत आभार सर

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