कभी इस तरफ देख लिया करो
हम कभी तुम्हारे सरमाए थे
हर ग्येर से बात करते हो
हम तोह तुम्हारे अपने थे
सरमाए
Comments
5 responses to “सरमाए”
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गैर, तो
अपने ही अपनों के दुश्मन बन जाते हैं गैर तो कुछ नहीं बिगाड़ पाता
अपने ही कातिल बन जाते हैं।-

धन्यवाद
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सामयिक परिवेश में सटीक बैठता है। देखने में छोटा पद है पर बड़ा गहरा भाव रखता है।
खूब -
बहुत सुंदर, लेखनी को सलाम
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Thanks
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