सहारे

समन्दर के कभी दो किनारे नहीं मिलते,
हमसे तो आकर ही हमारे नहीं मिलते,

बात ये है के विचारधारायें भिन्न हैं सभीकी,
तभी तो ढूढे से किसी को सहारे नहीं मिलते।।
राही (अंजाना)

Comments

4 responses to “सहारे”

  1. Antariksha Saha Avatar
    Antariksha Saha

    बहुत खूब भाई

  2. Dharamveer Verma Avatar

    बहुत सुन्दर पंक्ति है, मित्र। लिखते रहिये

  3. राम नरेशपुरवाला

    Good

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