सांपों का शहर

सांप ने कहा अपने साथियों से
मैं देख आया हूँ शहर की जमीन
वहां चूहों के अनगिनत बिल है
आज ही पलायन करो शहर की ओर
चूहे भी खाएंगे और बना बनाया
घर पाएंगे
वहां के इंसान अपनी जाति का समझ कर
दूध पिलाएंगे
इस प्रकार वे शहर जाते हैं
मोटे तगड़े चूहो को निगल नहीं पाते हैं
चूहे ललकारते हैं
मत डराओ अपने गरल से
हम गाँव के चूहे नहीं है
यहां जहर खाते और पीते हैं
तुमसे भी ज्यादा खतरनाक है
क्यूँकि जहर में जीते हैं

Comments

4 responses to “सांपों का शहर”

  1. Ekta Gupta

    बहुत खूब

  2. vikash kumar

    Great

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