सुलह की बात करने पर

सुलह की बात करने पर
न समझो डर गए हैं हम
बस यही चाहते हैं दूरियां
हो जायें थोड़ी कम।

Comments

6 responses to “सुलह की बात करने पर”

  1. वाह वाह बहुत खूब पाण्डेय जी

  2. बहुत खूब बहुत सुन्दर

  3. वाह वाह अतिसुन्दर

  4. कवि की श्रेष्ठ भावनाएं ।

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