समस्त देश आज सेना के सम्मान में खड़ा है।
पता नहीं तू किस मानसिकता से विरोध में अड़ा है।
राजनीति के मौके, और भी आएंगे भविष्य में,
विरोधाभास भूल प्रमाण दो, हृदय तुम्हारा भी बड़ा है।
चाटुकारों की चाटुकारिता भी, चरम पर है आज,
‘सरगना’ से भी ज्यादा ज्ञान, इनके खजानों में पड़ा है।
सेना की शौर्यता पर, प्रश्न चिन्ह उठाने वालों,
देश के लिए वो कल भी लड़ा है, और आज भी लड़ा है।
देवेश साखरे ‘देव’
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