सॉझ को आखिर सुख का सवेरा कब तक लिक्खूं By Arya Harish Koshal Puri Posted on January 16, 2016November 26, 2018 Category : हिन्दी-उर्दू कविता सॉझ को आखिर सुख का सवेरा कब तक लिक्खूं ! उजियारे को घोर अंधेरा कब तक लिक्खूं !! चारो तरफ है घोर निराशा फिर भी आशा लिख देता हूं ! सारे सुखों पे दुःख का डेरा कब तक लिक्खूं !!
bahut ache dost
nice one 🙂
सारे सुखों पे दुःख का डेरा कब तक लिक्खूं !!
अतिसुन्दर