सोच की लाज

तूने सोच का जो बीज भरा

कुछ तो सोच के होगा भ्ररा

उस सोच की लाज रखता हूँ

हर कदम सोच के बडता हूँ

 

….. यूई

Comments

One response to “सोच की लाज”

  1. Pratima chaudhary

    Sundar

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