#shayri

कैसे तेरी पहचान करूँ ?

कोई कहता तू ऐसा है कोई कहता तूं वैसा है मिल जाऊँ कभी तुमसे तो कैसे तेरी पहचान करूँ ?   ….. यूई »

तू सबके दुःख हर जाता है

मुझे ख़ुद की लगी रहती है तुझे सबकी पड़ी रहती है मैं ख़ुद के समेट ना पाता हूँ तू सबके दुःख हर जाता है   ….. यूई »

सबके अन्दर बसता है

मैं सोच ही ना पाता हूँ कैसे तू यह सब करता है सबके अन्दर बसता है सबको ख़ुद में रखता है   ….. यूई »

तुझसे आगे ना सोच पाया

ख़ुद का करके सब देख् लिया ख़ुद का चाह के भी देख् लिया अंत में जब सबको जोड़ पाया पाया तुझसे आगे ना सोच पाया   ….. यूई »

तुझको हर दर पर तो पाता हूँ

नास्तिक सब कह्ते हैं मुझको क्यों ना तेरे दर पे जाता हूँ अब कैसे समझाऊं मैं सबको तुझको हर दर पर तो पाता हूँ   ….. यूई »

सोच की लाज

तूने सोच का जो बीज भरा कुछ तो सोच के होगा भ्ररा उस सोच की लाज रखता हूँ हर कदम सोच के बडता हूँ   ….. यूई »

हर दिन इक जीवन

हर दिन इक जीवन जीता हूँ उसको हाँ पर पूरा जीता हूँ जो भी तूने आज कम दिए उनको पूरा करके मरता हूँ   ….. यूई »

अब तैयारी है

जब से यह एहसास हुआ मेरा है जो सब कुछ यहा वोह असल में तो तेरा है तबसे हलका हो गया हू उड़ने की अब तैयारी है   ….. यूई »

तेरी मर्ज़िया

कहते है जो कुछ होता है सब यहा होती सब में सिर्फ़ तेरी मर्ज़िया है होता था पहले कभी शक़ मुझको अब बची ना कोई शिकायत है   ….. यूई »

कोई शिकायत नही तुमसे

जाने क्यों कोई शिकायत नही तुमसे मालूम नही के कैसा तुझ्से रिश्ता है हाथ उठ भी नही पाते दुआ में तेरी रह्मत तेरी पहले ही बरस जाती है   ….. यूई »

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