स्वेच्छाकृत प्रदान की गई वस्तु नहीं कहलाते दहेज रे!

स्वेच्छाकृत प्रदान की गई वस्तु नहीं कहलाते दहेज रे!
माँग की गई वस्तु ही तो कहलाते है दहेज रे!
स्वेच्छाकृत प्रदान की गई वस्तु नहीं कहलाते दहेज रे!
मात-पिता के द्वारा दी गई वस्तु कहलाते है वरदान रे! और
माँग की गई वस्तु ही तो कहलाते है अभिशाप रे !
स्वेच्छाकृत प्रदान की गई वस्तु नहीं कहलाते दहेज रे!
अमीर हो या गरीब हो दहेज दोनों के लिए घातक रे! क्योंकि
इसके कारण मरती युवतियाँ अविवाहित रे!
स्वेच्छाकृत प्रदान की गई वस्तु नहीं कहलाते दहेज रे!
हमने जहां से सुना है युवा होते देश के शान रे!
पर कैसे मान ले हम ? ये तो लूटते है युवतियों के आन रे!
स्वेच्छाकृत प्रदान की गई वस्तु नहीं कहलाते दहेज रे!
 विकास कुमार

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