सड़कों के गड्ढे भर दो ना
सचमुच विकास कर दो ना,
जो किये वायदे हमेशा से
उनमें दो-चार पूरे कर दो ना।
सड़कों के गड्ढे भर दो ना
Comments
14 responses to “सड़कों के गड्ढे भर दो ना”
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बहुत ही सुंदर
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धन्यवाद
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नेताओं और सरकार पर अच्छा तंज कसती व्यंगात्मक पंक्तियां
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बहुत बहुत धन्यवाद
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Very nice poem
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Thanks
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व्यंग्यात्मक शैली में सच्चाई को सामने लाने वाली सुन्दर कविता
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बहुत बहुत धन्यवाद
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बहुत खूब
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धन्यवाद जी
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वास्तविकता का चित्रण किया गया है
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आभार संदीप जी
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अतिसुंदर
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सादर धन्यवाद
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