“हकीकत”

ना जाने लोग अपनी “मंज़िल” को सपना क्यों कहते हैं?
मंज़िल तक जाना , उसे पाना
सपना नहीं “हकीकत” बनाना चाहती हूँ !

Comments

6 responses to ““हकीकत””

  1. Abhishek kumar

    सुन्दर रचना

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