फिर से आज हमने कलम उठाई है…
हाथ में फिर वही पुरानी डायरी आई है…
सोच ही रहे थे कुछ नया लिखने में क्या बुराई है..
कलम से ही तो किताबो ने अपनी दुनिया सजाई है …
कुछ नया उसमे जुड़ता रहे इसीलिए तो कलम बनायीं है….
कलम ने नयी दुनिया की एक नयी पहचान बनायीं है……..
लिखते तो कई है पर…….
किसी की कलम ने उम्मीद की जोत जलायी है ….
तो किसी की कलम ने बस आग लगायी है ….
पर इस बात में उतनी ही सचाई है ….
की हर कलम ने अपनी एक पहचान बनायीं है ………
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