10 Comments

  1. हम जीवन के सुख-दुख,
    घर में ही बाॅंटते हैं।
    बाहर मिलते हैं विरोधी,
    रास्ते भी काटते हैं।
    —- सच्ची पंक्तियाँ, बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति।

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