हमारी धरती मां

गेंद जैसी गोल
धरोहर है अनमोल
थकती नहीं दिन रात सूरज के चक्कर लगाती है जीवो को अपने अंचल में बसाती है इसीलिए तो यह धरती माता कहलाती है
लेकिन कई दिनो से है यह बीमार
ऊपर से परमाणु परीक्षण उसके अस्तित्व को रहा है ललकार
ग्लोबल वार्मिंग, प्रदूषण, वनो का संहार जैसे भयानक खतरे हैं तैयार
फिर भी वह देती है पुत्रों को उपहार
ममता दया दुलार
आओ सब मिल करे अपनी धरती मां का श्रंगार

Comments

5 responses to “हमारी धरती मां”

  1. Amita Gupta

    आओ सब मिलकर करें धरती मां का श्रंगार,
    सुंदर अभिव्यक्ति

  2. राकेश पाठक

    सादर धन्यवाद

  3. Ekta Gupta

    जीवो को अपने आंचल में बसाती है इसीलिए तो यह धरती माता कहलाती है ।सुंदर रचना

  4. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    अतिसुंदर भाव पूर्ण रचना
    कम शब्दों में बड़ी सच्चाई
    कवि पाठकजी ने दर्शाई

  5. Pragya Shukla

    बिल्कुल सही कहा

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