हम तो विद्वतजनों के कायल हैं,
उनकी सच्चाइयां हैं मित्र अपनी,
उनकी अच्छाइयाँ हैं मित्र अपनी,
उनकी वाणी से लाभ पायें सभी,
उनको कोई भी दुख न होवे कभी।
हम तो विद्वतजनों के कायल हैं
Comments
5 responses to “हम तो विद्वतजनों के कायल हैं”
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वाह वाह
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बहुत खूब
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बहुत खूब, लाजवाब सर
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सुंदर
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कवि सतीश जी के अति सुंदर भाव और प्रस्तुति
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