देना चाहती हूं सूखे होंठो पर हंसी,
निराश डूबती सी आंखों में रोशनी,
सूखे उलझे बालों में नमी,
हारी सी जिंदगी को जीत की खुशी,
छोटी- छोटी सी वस्तूए मिल जाने पर
चेहरे पर छाई खुशी।
हां…… मैं देना चाहती हूं,!!
सम्मान, प्यार का उपहार
उन मासूम नन्हे चेहरों को।
निमिषा सिंघल
हां . . मैं देना चाहती हूं!
Comments
8 responses to “हां . . मैं देना चाहती हूं!”
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Good one
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Thank you
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Nice
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Dhanyavad
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Bahut khub
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Thank you
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वाह बहुत सुंदर
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Thank you
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