वो ऊपर बैठ कर ही सारे हिसाब लिख देता है,
इस ज़मी पर हम सबकी किताब लिख देता है,
आता नहीं उतर कर कभी चेहरा अपना दिखाने,
अंतर्मन के हमें पर वो सारे जवाब लिख देता है।।
राही (अंजाना)
हिसाब
Comments
5 responses to “हिसाब”
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Nice
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Thank you
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सुपर
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Thank you
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awesome bhai
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