यह जीवन है अजर-अमर तो
क्यों द्वेष-भाव तुम रखते हो
वाचन से तो अच्छे हो पर
मन में विष क्यों रखते हो,
मन में विष क्यों रखते हो
जीवन चार दिनों का
जीवन ना देता है
फिर मिलने का मौका
मिलकर रहो सभी
और प्रेम के दीप जलाओ
हो त्यौहार कोई भी
मिलकर सभी मनाओ ।।
होते त्योहार कोई भी मिलकर सभी मनाओ
Comments
5 responses to “होते त्योहार कोई भी मिलकर सभी मनाओ”
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माफ कीजिएगा
हो त्योहार कोई भी
मिलकर सभी मनाओ”
यह शीर्षक है। -
Nice
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धन्यवाद
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अति सुन्दर
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धन्यवाद
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