होली है

इस बार की होली पर अवगुण जलाये जाएंगे,
हर जन मन के हृदय में सद्गुण सजाये जाएंगे।

जो रूठ के बैठ गए थे कभी संग साथी अपने,
लगाकर गले सब दुःख सन्ताप भुलाए जाएंगे।

आएंगे आँगन में आज खेलेंगे और खिलाएंगे,
माथे से उन सबके स्नेह तिलक लगाये जाएंगे।

सूखी जीवन की बेरंग चादर पर सोये हुए जो,
आज तन मन रंगों से उनके भी भिगाये जाएंगे।

गाँव शहर गली गलियारे चौक चौबारे गूंजेंगे,
होली आई के गीत सभी कानों में सुनाये जाएंगे।

थोड़ी सी भांग पीकर जो धरती माँ से लिपट गए,
तो राही हमभी किसी तरह से घर पहुंचाये जाएंगे।

राही अंजाना

Comments

2 responses to “होली है”

  1. Amita

    बहुत सुंदर भावपूर्ण अभिव्यक्ति

  2. vikash kumar

    Great

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