होश अब नहीं रहा इंसानियत का,
बेसुध से सब हो गए हैं ,
जाने कैसा है यह नशा
अपने भी गुम हो गए हैं।
होश अब नहीं रहा…
Comments
6 responses to “होश अब नहीं रहा…”
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Sunder
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धन्यवाद
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वास्तव में लोभ , अहंकार के नशें में सबकुछ बदलाव की कगार पर है
बहुत ही सुंदर पंक्तियां-

धन्यवाद
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very nice
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Thank you
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