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  1. कवि सतीश जी की बहुत ही सुन्दर, रोला छंद से सुशोभित अति सुन्दर कविता ।”मंजिल पानी है तो, हौसला रख आगे बढ़,
    विचलित मत हो किंचित, जीत का स्वाद तू चखअपने को कमजोर, समझ कर भूल न कर तू,”
    कवि सतीश जी की बहुत सुन्दर पंक्तियां हैं ,कवि हौसला बढ़ाने की बात करते हैं और स्वयं को कमज़ोर समझने को मना किया है , विचलित ना होने की भी सुंदर सलाह दी है , उसके बाद जीत की बात,जो किसी के भी उत्साह वर्धन में सहायक होगी । बहुत शानदार प्रस्तुति है , वाह👏

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