यूं ही तुम ना आते सीने में
ना चोरी मेरा दिल हो पाता
ना कृष्ण मीठी रासलीला रचता
ना इश्क का नाम यूं ही कोई जान पाता
यूं ही ये दिल दीवाना ना होता
काश यूं ही ये मेरे पास रह जाता
प्यार किया नहीं जाता जनाब हो जाता है
काश ये बात हर कोई यूं ही समझ पाता
यूं ही ना करता ये सजदे तेरे
ना इस कदर प्यार की रचना रच पाता
हम तेरे प्यार में किस कद्र ङूबे हैं
काश यूं ही तू ये बात समझ जाता
फिर क्या जरूरत थी दुनिया को दर्द बताने की
जो तू यूं ही आकर मुझे सीने से लगाता
By:-
मानसी राठौङ
? ? यूं ही ? ?
Comments
One response to “? ? यूं ही ? ?”
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बहुत बहुत बधाई
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