मौसम

चल रही है ठंडी हवाएं ,आँखों से बादल बरसेगा
रात के आगोश में . मेरा मेहताब पिघलेगा
मुद्दतों बाद फेंका है एक नजर का टुकड़ा उसने
पतझड़ के मौसम में भी , अब तो गुलशन महकेगा
@पंकज गर्ग

Comments

3 responses to “मौसम”

  1. राम नरेशपुरवाला

    Good

  2. Abhishek kumar

    Wow

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