वो जो गुजर गये यूं मुंह फ़ेरकर By Vipendra Pal Singh Posted on January 7, 2016November 26, 2018 Category : शेर-ओ-शायरी हिन्दी-उर्दू कविता वो जो गुजर गये यूं मुंह फ़ेरकर उतरा उतरा रहता है तब से मुंह मेरा कयामत थी या क्या थी वो मिलकर उससे मजरूह हो गया दिल मेरा.. [मजरूह – जख्मी]
bahut khoob!
nice!!
वाह बहुत सुंदर
जो गुजर गये यूं मुंह फ़ेरकर
उतरा उतरा रहता है तब से मुंह मेरा
वाह बहुत खूब