7 Comments

  1. कहते है अनकही कहानी अश्क मेरे
    हो न पायी जो बयां लफ़्जों में कभी
    सूख गया था रिश्ता जो दरम्या हमारे
    आज हो गया नम कुछ अश्को से हमारे

  2. कहानी तो अक्सर बया कर जाती है यह आँखे बिन कहे
    पर न जाने क्यों हम कभी अश्क़ो का सहारा नहीं लेते।

      1. छुपाना चाहता है अपना दर्द इस दुनिया से,
        शायद इसलिए अकेला रहे तड़प तड़प कर मरता है

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