मुक्तक 22

चुपके चुपके ही चाहा है, इज़हार किया न जीवन भर ,

एक डर में एक संशय में, मैं हाल ए दिल कैसे  कह पाऊँ.

जीवन के अंतिम क्षण में यदि बात जुबां तक आ जाये,

बस उसी काल मैं तृप्त हुआ ,दुनिया को छोड़ चला जाऊं..

…atr

Comments

6 responses to “मुक्तक 22”

  1. Abhishek Tripathi Avatar
    Abhishek Tripathi

    thanks bhai..

    1. Abhishek Tripathi Avatar
      Abhishek Tripathi

      dhanyavad mitr..

  2. राम नरेशपुरवाला

    Good

  3. Satish Pandey

    Waah wah

  4. Satish Pandey

    बहुत ही खूबसूरत पंक्तियाँ

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