कि दिल का हाल चेहरे से कुछ ब्यां न हो…

वो जब गली से गुजरें तो, कोई वहां न हो

घर के सिवाय मेरे कोई, घर खुला न हो।

बेहतर है कि दीवारों से, कुछ दूर ही मिलें

दीवारों के भी कान कहीं दरम्यां न हों।

मुमकिन है मिल रहीं हों, हाथों की लकीरें

पर बीच में तो कोई बुरा, ग्रह पड़ा न हो।

अब ये भी अदाकारियां, देता है इश्क ही

कि दिल का हाल चेहरे से कुछ ब्यां न हो।

ये डर भी साथ हो कि मोहब्बत की राह में

खाई तो पार कर लें, आगे कुआं न हो।

कितने ही दर्द इश्क के आंखों से बहेंगे

बस दिल जले तो ऐसे जले कि धुंआ न हो।

…………..सतीश कसेरा

Comments

10 responses to “कि दिल का हाल चेहरे से कुछ ब्यां न हो…”

  1. Payal sharma Avatar
    Payal sharma

    Very good poem… Congratulations

    1. satish Kasera Avatar
      satish Kasera

      Thanks Payal Sharma

  2. Mohit Sharma Avatar
    Mohit Sharma

    बहुत कोशिशों से नसीब होती है जन्नत
    पता चले कल कि, खुदा ही वहां न हो

    1. satish Kasera Avatar
      satish Kasera

      Thanks Mohit

  3. अंकित तिवारी Avatar

    कितने ही दर्द इश्क के आंखों से बहेंगे

    बस दिल जले तो ऐसे जले कि धुंआ न हो।
    Saandaar

    1. satish Kasera Avatar
      satish Kasera

      शुक्रिया अंकित

  4. राम नरेशपुरवाला

    Wah

  5. Satish Pandey

    बहुत खूब

  6. Satish Pandey

    वाह वाह

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