पुष्प की अभिलाषा -(एक मुक्तक)
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टूट कर शाख से शायद बिखर गया होगा
कुचल कर और ओ गुल निखर गया होगा |
जिसके जज्बे में वतन पे शहीद था होना
मुल्क के वास्ते मर कर ओ तर गया होगा ||
उपाध्याय…
मुक्तक-पुष्प की अभिलाषा
Comments
2 responses to “मुक्तक-पुष्प की अभिलाषा”
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behtareen ji
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V good
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